मोदी को पत्र, अब जीतेंद्र सिंह ने सोनिया को घेरा

नई दिल्ली अध्यक्ष के पीएम मोदी को पांच सूत्रीय चिठ्ठी लिखने के बाद से ही भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। भाजपा की तरफ से सुब्रमण्यम स्वामी और सुशील मोदी के बाद अब केंद्रीय मंत्री ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पाखंड का भांडा फूट गया है। डॉ जीतेंद्र सिंह ने एक तस्वीर ट्वीट की, जिसमें लिखा था कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान भी केंद्र की मोदी सरकार कर्मचारियों और वरिष्ठ नागरिकों को पूरा वेतन और पेंशन दे रही है। कांग्रेस नेतृत्व को केंद्र सरकार की आलोचना करने से पहले उन गैर भाजपा शासित या कांग्रेस शासित राज्यों की तरफ देखना चाहिए जिन्होंने कोरोना के कारण अपने कर्मचारियों के वेतन में कटौती की है। इसी तस्वीर के दूसरे भाग में कई राज्यों में कर्मचारियों के वेतन में हुई कमी का उल्लेख है ये राज्य गैर भाजपा शासित हैं।
  • ओडिसा सरकार ने ऑल इंडिया रैंक के अधिकारियों के वेतन को स्थगित कर 50 फीसदी कर दिया है।
  • महाराष्ट्र में ग्रुप एक के अधिकारियों का 50 फीसदी वेतन और ग्रुप सी के अधिकारियों का 25 फीसदी वेतन स्थगित कर दिया गया है।
  • राजस्थान में अधिकारियों के वेतन में 50 फीसदी और उससे नीचे के कर्मचारियों के वेतन में 30 फीसदी कमी करने का आदेश दिया गया है।
  • तेलंगाना सरकार ने ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारियों के वेतन में 60 फीसदी जबकि दूसरों के वेतन में 50 फीसदी कमी करने का आदेश दिया है।
  • केरल सरकार ने पांच महीनों तक सभी कर्मचारियों के 6 दिन का वेतन काटने का आदेश दिया है।
  • आंध्र प्रदेश सरकार ने ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारियों के वेतन में 60 फीसदी जबकि दूसरों के वेतन में 50 फीसदी कमी करने का आदेश दिया है।
बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) ने ट्वीट करते हुए चुटकी ली है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है कि आज सोनिया गांधी ने पीएम को पत्र भेजकर एमएसएमई (MSMEs) संकट के लिए पांच सूत्री समाधान का प्रस्ताव दिया है। उनका कहना है कि सोनिया गांधी अर्थशास्त्री नहीं हैं और न ही उनका प्रस्ताव लिखने वाले गोस्ट राइटर को अर्थशास्त्र का ज्ञान है। उनका कहना है एमएसएमई के लिए केवल हैंडआउट का प्रस्ताव है। एमएसएमई को कम ब्याज वाले ऋणों की आवश्यकता होती है और इसके उत्पादन की मांग के लिए एक कैप्टिव बाजार की जरूरत होती है, जो यूपीए सरकार के शासन काल में मारे जा चुके हैं।


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