कोरोना: मुंबई को मिली सुपर मशीन, जानें सब
मुंबई अगर को मात देने का रास्ता टेस्टिंग, टेस्टिंग और अधिक से अधिक टेस्टिंग ही है तो मुंबई को इस लड़ाई में एक बड़ा हथियार मिल गया है। महाराष्ट्र सरकार के मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग (DMER) को अमेरिका में निर्मित मशीन हासिल हुई है जो कोविड-19 के लिए टेस्ट स्वैब्स की क्षमता को दोगुना कर देती है। थर्मो फिशर क्वांट स्टूडियो नाम की यह मशीन मुंबई के जेजे हॉस्पिटल में इंस्टाल की गई है, जिससे हॉस्पिटल अब देश का सबसे बड़ा कोरोना टेस्टिंग सेंटर बन गया है। एक दिन में 2 हजार सैंपल्स की टेस्टिंग कर सकने वाली इस मशीन को नासिक स्थित डाटर कैंसर जेनेटिक्स ने कुछ साल पहले आयात किया था। मशीन की कीमत करीब साढ़े 3 करोड़ रुपये है। कंपनी ने इस मशीन को DMER को फ्री में दिया है। वर्तमान में शहर के प्राइवेट और पब्लिक लैब मिलकर एक दिन में 2200 सैंपल की टेस्टिंग कर रहे हैं। यह मशीन एक शिफ्ट (8 घंटे) में 2 हजार सैंपल की टेस्टिंग कर सकती है। डबल शिफ्ट में काम करने पर 4 हजार सैंपल की जांच संभव है। डाटर कैंसर जेनेटिक्स के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर राजन डाटर ने बताया, 'यह एक मल्टिपर्पज मशीन है, जो आठ घंटे की एक शिफ्ट में 2 हजार सैंपल की जांच कर सकती है। अगर पूल टेस्टिंग की अनुमति मिल जाए तो एक शिफ्ट में 10 हजार सैंपल टेस्ट किए जा सकते हैं। अगर काम करने वाले लोग अधिक हों तो एक से अधिक शिफ्ट में भी काम किया जा सकता है।' अधिकारियों का कहना है कि मशीन शुरू में एक हजार सैंपल्स की टेस्टिंग करती थी लेकिन फिर इसकी क्षमता बढ़ गई। एक अधिकारी के अनुसार मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के विभिन्न केंद्रों से सैंपल्स की टेस्टिंग के लिए सलॉट्स निर्धारित किए जाएंगे। उन्होंने बताया, 'हम रायगढ़ जिला, मीरा भयंदर, कल्याण-डोम्बिवली और अन्य केंद्रों के लिए भी स्लॉट्स बुक रखेंगे। इससे बैकलॉग क्लियर होता रहेगा।' जेजे हॉस्पिटस के लैब ऑफिसर ने बताया कि मशीन को इंस्टाल कर लिया गया था लेकिन पार्टिकुलर RNA एक्सट्रैक्शन किट का इंतजार किया जा रहा था। अधिकारी ने बताया, 'अपनी छोटी मशीनों में हम जिस RNA एक्सट्रैक्शन किट का यूज करते हैं, उसे इस मशीन में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इसलिए हम उसे बाहर से मंगवा रहे हैं। एक बार उनके आने पर टेस्टिंग शुरू की जा सकती है।' पढ़ें: डॉक्टर डाटर ने बताया कि वह इन किट्स को मंगाने के लिए DMER की मदद कर रहे हैं। उन्होंने बताया, 'राज्य सरकार को इन किट्स को थर्मो फिशर से मंगवाना पड़ेगा। कंपनी RNA एक्सट्रैक्शन किट की तुरंत सप्लाई करने के लिए तैयार है। हमने मदद की पेशकश की है। यह एक छोटी सी लॉजिस्टिकल समस्या है, जिसका समाधान जल्द कर लिया जाएगा।' जेजे हॉस्पिटल के अधिकारियों का कहना है कि वे टेस्टिंग मशीन का इंतजार कर रहे हैं। एक बार मशीन आ जाने पर हम उसमें दूसरी RNA एक्सट्रैक्शन किट यूज कर सकते हैं। हमें थर्मो फिशर की किट्स का ही इंतजार नहीं करना पड़ेगा। DMER के निदेशक डॉक्टर टी पी लहाने के अनुसार बुधवार तक यह मशीन ऑपरेशनल हो जाएगी। भारत में कोरोना वायरस से पहली मौत कब और कहां हुई? भारत में कोरोना वायरस से पहली मौत 12 मार्च को हुई। कर्नाटक के कलबुर्गी में सऊदी अरब से लौट 76 साल के शख्स भारत में इस वायरस के पहले शिकार बने।
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