तो कमलनाथ ने तैयारी क्यों नहीं कीः शिवराज
मध्य प्रदेश इन दिनों कई वजहों से चर्चा में है। शिवराज चौहान मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कोई चार हफ्ते तक बगैर कैबिनेट के रहे। कहा गया कि मंत्रियों के नाम पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ सहमति न बन पाने की वजह से यह देरी हुई। किसी तरह कैबिनेट गठित हुई, तो उसमें महज पांच मंत्रियों को ही जगह मिल पाई। इस बीच वहां कोरोना ने भी अपने पांव पसार लिए। मध्य प्रदेश में चलने वाली इस उठापटक से जुड़े सवालों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बात की एनबीटी नैशनल ब्यूरो की विशेष संवाददाता पूनम पाण्डे ने। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश : कैबिनेट गठन में इतनी देरी क्यों हुई? जब गठन हुआ भी तो सिर्फ पांच मंत्रियों को जगह मिली, कोई खास वजह? कार्यभार संभालने के बाद हमारी पहली प्राथमिकता कोरोना संकट से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम करने की थी। हमें मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक मजबूत बनाना था, पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं का प्रदेश में प्रबंध कर, सभी जिलों में हमें मेडिकल सेवाओं की उपलब्धता बढ़ानी थी। मैं सभी विधायकों, सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के लगातार संपर्क में था और कई निर्णय हमने आपसी संपर्क और समन्वय से लिए। प्रदेश में पूरा प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग आदि इस संकट से निपटने में लगे हैं। कोरोना संकट की स्थिति को संभालना हमारी पहली प्राथमिकता है। उचित समय देखते हुए हमने कैबिनेट का गठन किया और जिम्मेदारियां बांटी। कहा जा रहा है कि कांग्रेस से आए विधायकों और बीजेपी के मौजूदा विधायकों में से कितनों को मंत्री बनाया जाए, इस पर बात अटकी हुई थी? यह कहना सही नहीं है। इस समय हमें प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य पर और प्रदेश को कोरोना से बचाने पर ध्यान देना चाहिए। जो इस महामारी के दौर में भी राजनीतिक दृष्टि से बातें बना रहे हैं, उनकी अपनी सोच और अपना नजरिया है। मंत्रिमंडल के गठन का निर्णय राष्ट्रीय संगठन और राज्य संगठन के आपसी विमर्श के बाद लिया गया है। हम सभी की प्राथमिकता राज्य की बेहतरी के लिए काम करना और कोरोना संकट से निपटना है। जब प्रधानमंत्री की तरफ से अपील की गई थी कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, उसके बाद आपके विधायक दल की मीटिंग हुई, फिर सरकार बनी। आरोप है कि बीजेपी को कोरोना वायरस से निपटने की नहीं, कांग्रेस की सरकार गिराने की चिंता थी। इसमें कितनी सचाई है? हमारी मीटिंग्स में प्रधानमंत्री जी के आह्वान के अनुसार सभी मापदंडों को ध्यान रखते हुए और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ही काम किया गया। विपक्ष अपने अंतर्द्वंद्व से उपजी अपनी असफलता को पचा नहीं पा रहा है, इसीलिए ऐसे समय में भी बार-बार इस तरह की बातें सामने आ रही हैं। मेरा विचार है कि उन्हें इस संकट काल से निपटने में सहयोग देने पर ध्यान लगाना चाहिए, प्रदेशवासियों की सुरक्षा के लिए और क्या काम किए जा सकते हैं, इस विषय पर सोचना चाहिए और प्रदेश की सेवा के लिए जुट जाना चाहिए। क्या मध्य प्रदेश में राजनीतिक उथल-पुथल की वजह से कोरोना से निपटने के प्रयासों में देरी हुई? कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में समय रहते उचित प्रबंध नहीं किए गए। कमलनाथ जी कह रहे हैं कि राहुल गांधी ने फरवरी में अपने ट्वीट के जरिए ही इस महामारी को लेकर संकेत दिए थे। तब उन्होंने क्यों नहीं उचित कदम उठाए? तब सरकार क्यों इस विषय को लेकर गंभीर नहीं हुई? मैंने कार्यभार संभालने के तुरंत बाद ही अपना पूरा ध्यान इस गंभीर बीमारी से निपटने पर लगाया। इंदौर में हालात इतने खराब कैसे हुए? इंदौर प्रदेश का घनी आबादी वाला क्षेत्र और मध्य भारत का एक प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है। विदेश यात्रा करने वाले लोगों की संख्या यहां सबसे अधिक थी। शुरू में विदेश यात्रा से लौटकर आने वाले लोगों ने असुरक्षा, डर और जागरूकता के अभाव में संक्रमण की जानकारी छुपाई और ये लोग जाने-अनजाने अन्य लोगों के संपर्क में आए जिससे संक्रमण फैलता गया। समय रहते ही हमें केंद्र से विदेश यात्रा कर आए ऐसे 55,000 लोगों की जानकारी मिली, जिस पर तुरंत संज्ञान लिया गया। सीमाएं सील की गईं और संक्रमित व्यक्तियों को क्वारंटीन किया गया। कोरोना से निपटने का मध्य प्रदेश का क्या मॉडल है? सरकार क्या-क्या कर रही है? हर जिले में डीएम की अध्यक्षता में बना क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप रोज बैठक कर आगे की रणनीति तैयार कर उसे लागू करवा रहा है। राज्य के वरिष्ठ अधिकारी हर क्षेत्र में व्यवस्था देख रहे हैं। नर्सिंग होम एसोसिएशन के साथ बैठक के बाद निजी अस्पतालों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया। कई निजी अस्पताल इस महामारी से निपटने के लिए अपना पूरा अस्पताल देने का प्रस्ताव दे रहे हैं, उन्हें आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं।
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