कोरोना: पहले प्लाजमा डोनर बोले- शरीर भी ले लें
दिल्ली मुझे नहीं पता कि मेरा प्लाज्मा किसे चढ़ाया गया है, वो कौन है, उसका क्या मजहब है? मैंने अपने किसी भाई के लिए प्लाज्मा डोनेट (Corona Plasma Therapy) किया है। मुझे खुशी है कि मेरा प्लाजमा किसी के काम आ सका। यह महामारी पूरे देश को दर्द दे रही है। हम सभी का सिर्फ एक मकसद होना चाहिए कि हम इस बीमारी के खिलाफ जारी जंग जीतें। मुझे खुशी होगी कि कोरोना के रिसर्च या किसी भी ट्रायल में मेरा शरीर काम आ सके तो मैं देश के लिए हमेशा तैयार हूं। ये शब्द और जज्बात हैं कोविड वॉरियर तबरेज खान के, जो दिल्ली के पहले प्लाज्मा डोनर हैं, जिनके डोनेशन की वजह से दिल्ली में प्लाज्मा थेरेपी का ट्रायल शुरू हो पाया है। तबरेज न केवल इस वायरस को मात देने वालों में से एक हैं, बल्कि वो पहले प्लाज्मा डोनर () भी हैं। मोजे का कारोबार करने वाले 36 साल के तबरेज जहांगीरपुरी में रहते हैं। संक्रमित होने और प्लाज्मा डोनेशन तक की घटना के बारे में उन्होंने बताया कि उनकी बहन दुबई से आईं थीं, जो पॉजिटिव मिली थीं। 5 अप्रैल को मिली छुट्टी 18 मार्च से एलएनजेपी अस्पताल में शुरू हुआ। 3 अप्रैल को पहली बार उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई और 5 अप्रैल को दूसरी बार रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। 19 अप्रैल तक वह घर में क्वारंटीन रहे। मुझे सीएम की अपील अच्छी लगी और मैंने अस्पताल को कॉल किया। 'तीन साइकल में निकाला गया प्लाजमा' आईएलबीएस अस्पताल में मेरी बात डॉक्टर अनिता से हुई। 10-10 मिनट के तीन साइकल में प्लाज्मा निकाला गया। इस दौरान मुझे किसी प्रकार का दर्द नहीं हुआ और न ही डोनेशन के बाद कोई कमजोरी आई। डॉक्टर सरीन ने मुझे इतना बताया कि एलएनजेपी में दो मरीज को मेरा प्लाज्मा दिया गया है और वो दोनों ठीक हो गए। यह सुनकर दिल का सुकून मिला।
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