'तबलीगी जमात पर गर्व है', जानिए आखिर क्यों

नई दिल्ली इन दिनों (Coronaivirus in india) फैलने की वजह से लॉकडाउन (Lockdown in india) है। घरों में कैद लोग (Tablighi Jamaat) को कोसते नजर आ रहे हैं, क्योंकि 4000 से भी अधिक मामले तबलीगी जमात से जुड़े हैं। इसी बीच ट्विटर पर '#तब्लीगी_जमात_पर_गर्व_है' टॉप ट्रेंड (Twitter top trend) हो रहा है। तो आखिर ऐसा क्या हो गया, जिसके वजह से उस तब्लीगी जमात पर लोग गर्व कर रहे हैं, जिसे कल तक कोसते थे। दरअसल, तबलीगी जमात के बहुत से लोगों ने प्लाज्मा डोनेट () करने का फैसला किया है, जिसके जरिए कोरोना वायरस के मरीज को सही करने में मदद मिलेगी। यही वजह है कि अब बहुत से लोग तबलीगी जमात पर गर्व कर रहे हैं और ये हैशटैग ट्रेंड कर रहा है। प्लाज्मा डोनेट करना चाहते हैं तबलीगी जमात के लोग इलाज करवाकर ठीक हुए तबलीगी जमात के लोगों के बीच से एक अच्छी खबर आई है। कोरोना वायरस के संभव इलाज के लिए इन लोगों ने भी अपना प्लाज्मा देने की इच्छा जताई है। दरअसल, झज्जर के एम्स में 142 तबलीगी जमात के लोगों को भर्ती किया गया था। इनमें से 129 तबलीगी जमात के लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं। इनमें से कई ने प्लाज्मा थेरपी के लिए अपना प्लाज्मा देने को रजामंदी दी है। दिल्ली सरकार पहले ही ठीक हुए लोगों के प्लाज्मा डोनेट करने की अपील कर चुकी है। यह भी पढ़ें- ट्विटर पर क्या कह रहे हैं लोग? एक ट्विटर यूजर ने प्लाज्मा डोनेट करने के लिए बैठे तबलीगी जमात के लोगों की तस्वीर शेयर करते हुए उनकी तारीफ की है। तमिलनाडु से तबलीगी जमात के फारूक बाशा ने भी प्लाज्मा डोनेट किया। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। यह भी पढ़ें- एक अन्य यूजर ने तबलीगी जमात के एक सदस्य की एक डॉक्टर के साथ तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है कि कोरोना से ठीक हुए मुस्लिम अब दूसरों की मदद कर रहे हैं। यह भी पढ़ें- 4000 से ज्यादा मामले तबलीगी जमात के पिछले दिनों ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि देश में 4000 से भी अधिक मामले तबलीगी जमात के हैं। करीब 40 हजार लोगों को क्वारंटीन में रखा गया है। करीब हफ्ते भर पहले की जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार असम के 91%, तमिलनाडु के 84%, अंडमान के 83%, तेलंगाना के 79%, दिल्ली के 63%, मध्य प्रदेश के 61% और उत्तर प्रदेश के 59% मामले तबलीगी जमात से जुड़े हैं। बता दें कि अब तक देश में कोरोना वायरस से करीब 28 हजार मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 872 लोगों की मौत हो चुकी है।


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