प्रयागराज में 10,000 के 'संकटमोचक' योगी
प्रयागराज/लखनऊ पहले दिल्ली में फंसे मजदूरों की घर वापसी, फिर कोटा से साढ़े 7 हजार कोचिंग छात्रों को सुरक्षित घर पहुंचाना। कोरोना वायरस और लॉकडाउन के बीच यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ऐसे कई प्रभावी कदम उठाए हैं। इस बार सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ प्रयागराज में 10 हजार प्रतियोगी छात्र-छात्राओं के संकटमोचक बने हैं। रोडवेज की 300 बसों से भेजे जा रहे प्रतियोगी छात्र सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज के करीब 10 हजार प्रतियोगी छात्र-छात्राओं को सोमवार को घर भेजने का फैसला लिया। इस काम में रोडवेज की 300 बसें लगाई गई हैं। लॉकडाउन की वजह से कॉम्पिटिशन की तैयारी करने वाले ये स्टूडेंट्स एक महीने से ज्यादा वक्त से प्रयागराज में फंसे हुए थे। सीएम योगी के निर्देश के बाद रात 9 बजे प्रयागराज से प्रतियोगियों को घर भेजने का काम शुरू हुआ। बचे छात्र-छात्राओं को आज अलग-अलग जिलों में उनके घर भेजा जा रहा है। पढ़ें: छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग बसें इससे पहले कोटा से भी यूपी के साढ़े 7 हजार कोचिंग छात्रों को वापस लाया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को टीम-11 की बैठक में इस संबंध में निर्देश दिया था। छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग बसें लगाने के निर्देश दिए गए। पहले चरण में सोनभद्र, मीरजापुर, चंदौली, वाराणसी, जौनपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी और चित्रकूट के लिए बसें लगाई गई हैं। वहीं, दूसरे प्रदेशों के स्टूडेंट्स को अगर उनके गृह राज्य वापस ले जाने की व्यवस्था करते हैं तो उन्हें भी इजाजत दी जाएगी। प्रयागराज से 4 जगहों से भेजी जा रहीं बसें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए प्रयागराज में चार जगहों से इन बसों को रवाना किया जा रहा है। सिविल लाइंस स्थित हनुमान मंदिर चौराहे से मीरजापुर, सोनभद्र और चित्रकूट जिलों के लिए बसें चलाई गईं। जबकि हिन्दू हॉस्टल चौराहे से चंदौली, वाराणसी, भदोही और जौनपुर के छात्र-छात्राओं को उनके घर भेजा गया। इसी तरह सिविल लाइन्स में पत्थर गिरिजाघर से फतेहपुर और कौशाम्बी के लिए बसें भेजी गईं। लोक सेवा आयोग से प्रतापगढ़ जिले के लिए बसों को रवाना किया गया। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, 1 बस में 26 लोग बसों का संचालन रात 12 बजे तक किया गया। बचे छात्र-छात्राओं को मंगलवार सुबह आठ बजे से दूसरी बसों से भेजा जा रहा है। छात्र-छात्राओं को उनके घर तक भेजने के लिए बसों में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जा रहा है। एक बस में 26 स्टूडेंट्स को ही भेजा जा रहा है। इसके साथ ही उनके नाम और पते भी नोट किये जा रहे हैं। कोरोना वायरस: जिला मुख्यालयों से प्रशासन करेगा इंतजामसभी छात्र-छात्राओं को बसों के जरिए उनके जिला मुख्यालयों पर छोड़ा जायेगा। जहां से जिला प्रशासन ही उन्हें घर तक भेजने का इंतजाम करेगा। प्रयागराज में हजारों छात्र-छात्राएं पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूसरे जिलों से आकर रहते हैं। लॉकडाउन के दौरान इन छात्रों के पास राशन से लेकर रुपये तक खत्म हो गए थे। जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। कुछ स्थानीय लोग छात्र-छात्राओं की मदद तो कर रहे थे लेकिन वह नाकाफी थी। महीनों से प्रयागराज में फंसे स्टूडेंट्स अब सरकार के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। भारत में कोरोना पर अब तक का अपडेट देश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला 30 जनवरी को केरल में सामने आया था। चीन के वुहान यूनिवर्सिटी से लौटे एक छात्र में कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए थे। कोरोना वायरस से पहली मौत 12 मार्च को हुई। कर्नाटक के कलबुर्गी में सऊदी अरब से लौट 76 साल के शख्स भारत में इस वायरस के पहले शिकार बने। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक मंगलवार सुबह तक देश में कोरोना संक्रमण से मरने वालों की संख्या 934 हो गई है। इसके साथ ही संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 29,435 पहुंच गई है। मंगलवार सुबह तक 6,869 लोग ठीक हो चुके हैं और एक व्यक्ति विदेश चला गया है। कुल मामलों में 111 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
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