...तो दिल्ली को सुलगाने के पीछे PFI का हाथ?

राजशेखर झा, नई दिल्ली तीसरे दिन भी दिल्ली में हिंसा जारी है, जिसे देखते हुए अगले 24 घंटों तक हाई अलर्ट पर रहेगी, क्योंकि इंटेलिजेंस एजेंसियों को पता चला है कि शहर के हालात अभी और तनावपूर्ण हो सकते हैं। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप भारत दौरे पर हैं और आज दिल्ली में हैं। उन्हें राजघाट भी जाना है। वह रात करीब 10 बजे यहां से वापस अमेरिका के लिए रवाना होंगे। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि की ओर दुनिया का ध्यान खींचने के लिए प्रदर्शनकारी फिर से हिंसक प्रदर्शन कर सकते हैं। इंटेलिजेंस ब्रांच और स्पेशल सेल हर घटना पर नजर बनाए हुए हैं और लगातार इंटेलिजेंस ब्यूरो के साथ हर अपडेट शेयर कर रही हैं। इतना ही नहीं, ये सारी जानकारी आगे ट्रंप के सीक्रेट सर्विस ऑफिसर्स के साथ भी साझा की जा रही हैं। बता दें कि राजघाट जाने वाले रास्ते को सोमवार शाम ही चेक किया गया है और अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात कर दिया गया है। शक के दायरे में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पुलिस को सीएए के खिलाफ प्रदर्शन से किसी साजिश की बू आ रही है। जांच में जुटी सुरक्षा एजेंसियों को तीन ऑर्गेनाइजेशन पर शक है, जिसमें पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) भी शामिल है। माना जा रहा है कि सोमवार को कंट्रोल से बाहर हुई हिंसा में पीएफआई का भी हाथ था। बता दें कि इस आर्गेनाइजेशन पर पहले से ही सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोगों को यूपी और दिल्ली में फंडिंग करने के आरोप में जांच चल रही है। हिंसक प्रदर्शनों में एक पुलिस वालों की मौत होने और दर्जनों घायल होने के बाद पुलिस ने अपनी रणनीति भी बदलने पर जोर दिया है। सोमवार शाम को ही एक बैठक भी बुलाई गई थी, जिसमें ये तय किया गया कि मंगलवार यानी आज दिल्ली में स्थिति को कैसे काबू में रखा जाएगा। पुलिस के इंतजाम रहे नाकाफी प्रदर्शनकारी हिंसा के लिए पहले से ही रणनीति बना चुके थे और इसी के तहत उन्होंने घरों, छतों, बालकनी और कॉलोनी के कई किनारों पर पहले से ही पत्थर और अगजनी की चीजें जमा कर रखी थीं। पुलिस इसका अंदाजा तक नहीं लगा सकी या यूं कहें कि इसका पता लगाने में असफल रही। बहुत से पुलिसवालों ने भी माना है कि पिछले दिनों दिल्ली में हुए प्रदर्शनों को देखते हुए पुलिस व्यवस्था के इंतजाम नाकाफी थे। दिसंबर में जो प्रदर्शन हुआ था, उसमें तो दिल्ली पुलिस ने कई इलाकों में इंटरनेट तक बंद कर दिया था, लेकिन इस बार पुख्ता इंतजाम नहीं थे। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया ने कुछ ऐसे पुलिसवालों से भी बात की जो दशकों से दिल्ली में कानून-व्यवस्था देखते आ रहे हैं। उन्होंने भी ये बात मानी कि इस बार पुलिस के इंतजाम नाकाफी थे। उन्होंने कहा कि पुलिस को तो तभी सजग हो जाना चाहिए था, जब रविवार शाम को मौजपुर में पत्थरबाजी हुई और करावल नगर में देर रात हिंसा की खबरें आईं, लेकिन पुलिस उदासीन रवैया अपनाए रही। पुलिस बैठी देखती रही है और स्थिति बद से बदतर होती चली गई और हालात धीरे-धीरे काबू से बाहर होते चले गए। बता दें कि ऐसे कई मौके रहे, जब हिंसा करने वालों ने लोगों से उनके नाम पूछ-पूछ कर उन्हें पीटा और घरों में आग लगाई, वो भी तब जब पुलिस वहां मौजूद थी। पुलिस का उदसीन रवैया दिखा वहीं दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस सभी आरोपों को खारिज कर रही है और दावा कर रही है कि उनकी ओर से पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। सोमवार शाम करीब 4 बजे पुलिस की ओर से एक सामान्य सा बयान जारी किया गया था, जिसमें कहा गया कि पूर्वी दिल्ली जिले के कुछ इलाकों खासर मौजपुर, कर्दमपुरी, चांद बाग और दयालपुर में कुछ हिंसा और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं। बड़े ही उदासीन रवैये के साथ पुलिस ने कहा कि इस घटनाओं को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


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