...जब मुस्लिमों के लिए हिंदुओं ने खोले दरवाजे

पंखुड़ी यादव/ जसजीव गांधीओक, नई दिल्लीउनके घर जला दिए गए, रोजमर्रा का हर सामान और रोजी-रोटी का जरिया भी राख में बदल गया। हिंसा की ये तस्वीरें बेहद दर्दनाक हैं, लेकिन नफरत के तांडव के बाद हिंदू-मुस्लिम एकता की कुछ तस्वीरें सुकून देने वाली हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के अशोक नगर में करीब 40 मुस्लिमों के लिए उनके हिंदू पड़ोसी सहारा बने हैं। मंगलवार को जब भीड़ ने इनके घर फूंक दिए तो जान बचाकर भागे लोगों के लिए इन हिंदुओं ने अपने घर के दरवाजे खोल दिए। उस दिन दोपहर में करीब 1000 लोगों की भीड़ बड़ी मस्जिद के निकट कॉलोनी में घुसी। इनमें से कई उपद्रवी मस्जिद में घुस गए, जहां करीब 20 लोग प्रार्थना में जुटे थे। अपने जले हुए घर के बाहर खड़े खुर्शीद आलम ने कहा, 'मैं मस्जिद में था, जब अचानक बड़ी संख्या में लोग अंदर घुसे और नारे लगाने लगे। हम अपनी जान बचाने को भागे।' यह भी पढ़ें: मस्जिद में भी तोड़फोड़ भीड़ ने मस्जिद में भी तोड़फोड़ की और आग भी लगा दी। स्थानीय व्यक्ति मोहम्मद तैय्यब ने बताया कि करीब 1:30 बजे कुछ लोग मस्जिद के ऊपर चढ़ गए और उन्होंने भगवा झंडे के साथ तिरंगा फहराया। इन्हें स्थानीय लोगों ने बुधवार सुबह हटा दिया। स्थानीय लोग उपद्रवियों से नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील करते रहे, लेकिन उन्होंने किसी कि नहीं सुनी। वे सभी बाहरी थे। '25 साल से रहते हैं परिवार की तरह' अशोक नगर के निवासी राजेश खत्री ने कहा, 'अधिकतर उपद्रवियों ने अपने चेहरे ढंक रखे थे और उनके हाथ में लोहे की छड़ें थीं। उन्होंने दुकानें जलानी शुरू कर दी। हम लोग डरे हुए थे कि वे हमारी जान ले सकते हैं।' दुकानों को निशाना बनाने के बाद वे छह घरों की ओर आगे बढ़े। मोहम्मद राशिद ने कहा, 'इस कॉलोनी में छह ही घर मुस्लिम परिवारों के हैं। मुझे विश्वास है कि उपद्रवी यह बात जानते थे, क्योंकि उन्होंने किसी अन्य घर को नुकसान नहीं पहुंचाया। उन्होंने कुछ नहीं छोड़ा, हर चीज लूट ली। अब हम बेघर हैं।' राशिद ने कहा, 'हालांकि, जब हमें लगा कि अब हमें सड़कों पर रहना होगा तो हमारे पड़ोसी हिंदू भाइयों ने हमारी मदद की। उन्होंने हमारा पूरा साथ दिया है और हमें अपने घर ले आश्रय दिया है। हम यहां 25 सालों से रह रहे हैं और कभी किसी हिंदू पड़ोसी से झगड़ा नहीं हुआ। हम यहां एक परिवार की तरह रह रहे हैं।' यह भी पढ़ें: 'नहीं छोड़ेंगे अकेले' मुस्लिम परिवारों को सहारा देने वाले पिंटू कहते हैं, 'जो भी हो जाए हम उनके साथ खड़े रहेंगे। हम भी हिंदू हैं, लेकिन उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की सोच भी नहीं सकते हैं। कुछ दुकानें जिनमें आग लगाई गई, वह इन परिवारों की थीं। अब उनका घर और रोजी-रोटी का साधन बर्बाद हो चुका है। संकट की इस घड़ी में हम उन्हें अकेले नहीं छोड़ सकते हैं।' 'हम एक दूसरे को नहीं पहुंचा सकते नुकसान' अशोक नगर के गली नंबर पांच में रहने वाले नीरज कुमार ने कहा कि हिंसा के बाद यहां लोगों ने एक दूसरे की मदद की। उन्होंने कहा, 'हम दंगा करने वाले किसी शख्स को नहीं जानते। यहां रहने वाले एक-दूसरे को कभी नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, क्योंकि हम एक दूसरे को सालों से जानते हैं। यहां दो बार हमला हुआ, पहले करीब 1 बजे और फिर करीब 4 बजे।' यह भी पढ़ें: 'देर से आई पुलिस, थाने में बिताई रात' जलाए गए छह घरों में से एक के निवासी दानिश ने कहा कि वे भीड़ के सामने असहाय थे। उन्होंने उस दिन के घटनाक्रम के बारे में कहा, 'हमने पुलिस को कई बार फोन किया, लेकिन पुलिस 1 घंटे की देरी से आई। तब तक बहुत नुकसान हो चुका था। फिर पुलिस हमें सुरक्षा के लिए थाने ले गए, जहां हमने रात बिताई।' दानिश के परिवार में छह भाई और उनके माता-पिता हैं। हिंदू की भी जलाई दुकान मस्जिद के नीचे ही दुकान में चप्पल बेचने वाले राज कुमार कहते हैं केवल मुसलमानों को ही नुकसान नहीं हुआ है। उनकी दुकान को भी लूटा गया और जला दिया गया। कुमार ने कहा, 'उन्होंने किसी को नहीं छोड़ा। मेरी दुकान पिछले कुछ दिनों से बंद थी। मुझे कोई अंदाजा नहीं था कि अशोक नगर में ऐसा होगा। मैं बुधवार सुबह दुकान देखने आया तो यहां सिर्फ राख मिला।'


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