सलाखों के पीछे आधी जिंदगी! आजाद हुए '101'
कोलकाता दिसंबर 2019 से पिछले 86 दिनों में बंगाल की जेलों से 101 कैदियों को रिहा किया गया है। ये ऐसे कैदी हैं जिन्हें की सजा सुनाई गई थी। एक सुधार-न्याय योजना के तहत इतने कम वक्त में बड़ी संख्या में कैदियों को मुक्त किया गया है। मंगलवार को 27 कैदियों को रिहा किया गया, इसमें दो महिलाएं शामिल हैं। इसी कदम के साथ बंगाल इस फेहरिस्त में तीन अंकों के आंकड़े को पार कर गया। माना जा रहा है कि 75 और कैदियों को जल्द ही रिहा किया जा सकता है। दरअसल, आजीवन कारावास की सजा पाए हुए लोगों की जल्दी रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्देशित प्रक्रिया का पालन करना होता है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने इसका अनुपालन करते हुए तेजी से सुनवाई की, जिसके तहत इतने बड़े पैमाने पर रिहाई संभव हो सकी। इस प्रक्रिया का पालन जरूरी राज्य सीआरपीसी की धारा 432 और 433 के तहत सजा बदल सकते हैं। हालांकि, उम्र कैद के मामलों में यह तभी संभव है जब अपराधी कम से कम 14 वर्ष की सजा काट चुका हो। गृह सचिव की अध्यक्षता वाला राज्य दंड समीक्षा बोर्ड मामलों की समीक्षा करता है और यदि कैदी मानकों के अनुरूप पाए जाते हैं तो सरकार से उनकी जल्द रिहाई की अनुशंसा की जाती है। ...और अदालत ने दिया निर्देशवर्ष 2010 से 2012 के बीच तीन वर्षों में 193 कैदियों को रिहा किया गया था। नवंबर 2012 में जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जस्टिस मदन बी लोकुर की ओर से सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रक्रिया में बदलाव हुआ। इसमें कहा गया कि राज्य सरकारों को आजीवन कारावास की सजा पाए अपराधियों के लिए इस शक्ति का प्रयोग करने से पहले अदालत की मंजूरी जरूर लेनी चाहिए। इस आदेश के बाद 2013 से 2018 के बीच रिहाई के मामलों में कमी आ गई। 2016 से वर्ष 2018 के बीच महज 7 लोगों को रिहा किया गया। इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए
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