खंभात: 18 पर केस, कठघरे में हिंदू संगठन

वडोदरा/आणंद गुजरात के आणंद जिले के खंभात में सांप्रदायिक हिंसा के मामले में पुलिस का ऐक्शन तेज हो गया है। खंभात पुलिस ने इस सिलसिले में 18 राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें हिंदू जागरण मंच के भी कई सदस्य शामिल हैं। दो दिन पहले कस्बे में हिंसक झड़पें देखने को मिली थीं। आणंद के जिला मैजिस्ट्रेट (डीएम) की ओर से जारी निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप में 18 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। डीएम ने इलाके में धारा 144 लागू करने का आदेश दिया था, इसके तहत चार या उससे ज्यादा लोग किसी सार्वजनिक स्थल पर इकट्ठा नहीं हो सकते हैं। आदेश के बावजूद मंगलवार को खंभात कस्बे के मेन टावर बाजार में एक सभा आयोजित की गई थी, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए थे। खंभात पुलिस के सब इंस्पेक्टर एमजे चौधरी ने पूर्व बीजेपी विधायक संजय पटेल, खंभात बीजेपी की शहर इकाई के अध्यक्ष पिनाकिन ब्रह्मभट्ट, योगेश शाह उर्फ सादी, ननका पटेल, जयवीर जयराज जोशी, नंदकिशोर ब्रह्मभट्ट, विश्वानंद स्वामी, हिंदू जागरण मंच के हंसा श्रीगोल, नाडियाड इकाई के अध्यक्ष एचजेएम केतन पटेल, वडोदरा इकाई के अध्यक्ष एचजेएम नीरज जैन, धर्मेन्द्र सिंह राठौड़, कल्पेश पंडित और अशोक खलासी के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसके अलावा पार्षद राजू राणा, पूर्व पार्षद मंगू शाह और रीता राणा के अलावा दो अन्य स्थानीय लोगों पर केस दर्ज हुआ है। इस बीच कस्बे में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। बुधवार से हिंसा की कोई घटना नहीं सामने आई है। खंभात सिटी पुलिस थाने में दर्ज शिकायत के मुताबिक रविवार को सांप्रदायिक हिंसा के बाद किसी जनसभा या कार्यक्रम की इजाजत नहीं दी गई थी। शिकायत में कहा गया है कि मंगलवार को नेताओं ने बंद की अपील की थी। इस दौरान छह हजार महिलाओं और पुरुषों की भीड़ जनसभा में शामिल होने के लिए गवारा टावर इलाके में पहुंच गई। एफआईआर के मुताबिक सभा के दौरान नेताओं ने भड़काऊ भाषण दिए। पुलिसकर्मियों ने बाद में नेताओं को भाषण देने से रोका और भीड़ को वहां से हटने के लिए कहा गया। एक अन्य एफआईआर में वीरल पटेल, जिग्नेश चुनारा और ईश्वर मच्ची समेत 500 लोगों पर मोचीवाड़ इलाके के घरों में तोड़फोड़ के आरोप में केस दर्ज किया गया है। खंभात में रविवार दोपहर तकरीबन एक बजकर 30 मिनट पर हिंसा शुरू हुई थी। उपद्रवियों ने 30 घरों और दुकानों को आग के हवाले कर दिया था। हिंसा में 13 लोग घायल हुए थे। स्थानीय पुलिस को भीड़ से निपटने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ा। इस दौरान स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस को करीब 30 आंसू गैल के गोले दागने पड़े।


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