अब DM, SP पर कोरोना रोकथाम की जिम्मेदारी

भारती जैन, नई दिल्ली देश भर में जारी लॉकडाउन के बावजूद लाखों की संख्या में मजदूर शहरों से अपने-अपने गांवों की ओर पलायन कर गए। इमर्जेंसी जैसे हालात में हुए इस पलायन ने अब सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। देश में यह लॉकडाउन इसलिए लागू किया गया था ताकि घातक के संक्रमण को कम्यूनिटी ट्रांस्फर होने से रोका जा सके। लेकिन इतनी बड़ी तादाद में लोगों के पलायन ने सरकार की मेहनत पर पानी सा फेर दिया है। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सरकार ने एक बार फिर से अपनी कमर कस ली है और अब केंद्र ने डिजास्टर मैनेजमेंट ऐक्ट के तहत डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) और सीनियर सुपरीटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) को यह जिम्मेदारी सौंपी है। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि अब डीएम और एसपी सभी जिला और राज्य की सीमाओं को सख्ती से सील कर दें और पलायन करके लौट रहे लोगों को स्थानीय लोगों के संपर्क में न आने दें। इसके साथ ही सरकार ने ये भी निर्देश दिए हैं कि जो मजदूर अपने घर की ओर चल दिए हैं उनके लिए गांव और कस्बे से दूर खाने-पीने और ठहरने की व्यवस्था भी की जाए। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश दिया है कि पलायन कर घर लौट रहे लोगों की कोविड- 19 के तहत पूरी स्क्रीनिंग करे और उन्हें हेल्थ प्रोटोकॉल के तहत अगले 14 दिनों तक सरकारी क्वॉरेंटाइन सुविधा केंद्रों में ही रखे। इस बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि वैसे तो पलायन करने वाले इन मजदूरों में विदेश यात्राओं से लौटे लोगों की तुलना में इस वायरस के कैरियर बनने की आशंका बहुत कम ही है। लेकिन सभी की गहन जांच होना जरूरी है क्योंकि कुछ लोग इनमें भी संक्रमित हो सकते हैं। प्रेस को संबोधित करने आए स्वास्थ्य मंत्रालय के जॉइंट सेक्रटरी लव अग्रवाल से जब यह सवाल किया गया कि जब मजदूर इतनी बड़ी संख्या में पलायन कर रहे थे तो क्या सरकार को इसकी जरा भी जानकारी नहीं थी? इसके जवाब में लव अग्रवाल ने कहा, 'कोरोना वायरस (कोविड- 19) के वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर फैलने की यह स्थिति अभूतपूर्व है। इस बीच केंद्र ने स्थिति पर हर संभव नियंत्रण में लाने के लिए त्वरित कदम उठाए हैं।' मजदूरों के इस पलायन की सबसे बड़ी वजह उनके कामकाज पर 21 दिनों तक ब्रेक लगना था। उन्होंने बताया कि सरकार ने लॉकडाउन लगाने के अलावा, राज्यों को यह निर्देश दिए हैं कि वह यह सुनिश्चित करे कि चाहे कोई किसी इंडस्ट्री में काम करता है या फिर किसी दुकान पर, उसे उसका पूरा वेतन समय पर मिले। सरकार ने यह भी कहा है कि लॉकडाउन के दौरान भी किसी का वेतन नहीं कटना चाहिए। सरकार की ओर से मकान मालिकों को भी यह कहा गया है कि जहां भी किराये पर रहने वाले लोग हैं वे उनसे इस महीने का किराया न मांगे। अगर मकान मालिक लेबर या छात्रों पर घर खाली करने का दबाव बनाते हैं तो राज्य पुलिस डिजास्टर मैनेजमेंट ऐक्ट के तहत उनके खिलाफ कार्यवाही करेगी। फिलहाल सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि लाखों की संख्या में जो ये मजदूर दूर-दराज वालों इलाकों में अपने घरों की ओर लौटे हैं कहीं वे कोविड- 19 के कैरियर न बन जाएं। ये लोग कहीं ग्रामीण इलाकों में इस वायरस को न फैला दें। इस वक्त सरकार हाई रिस्क वाले इलाकों को भी चिह्नित कर रही है। राज्यों के सचिव से बात की गई है कि कोरोना के लिए जहां भी वार्ड बनाए गए हैं वहां दूसरे मरीजों से अलग रहने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस वक्त भारत सरकार विदेशों से भी मास्क, वेंटिलेटर और अन्य जरूरी सामान मंगवाने के लिए काम कर रही है।


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