'खुदा' बनी खाकी, बेटे का नाम रखा रणविजय
लखनऊ कोरोना का खतरे को देखते हुए पूरे देश को 21 दिन के लिए लॉकडाउन किया जा चुका है। इस लॉकडाउन के बीच जहां आम लोगों को कई तरह की परेशानियां करनी पड़ रही हैं, वहीं कुछ 'कर्मवीर' ऐसे हैं, जिनके बेहतरीन काम से जुड़ी खबरें रूह तक सुकून दे जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी है तमन्ना और उनके पति अनीस खान की। कहानी भी ऐसी कि मुस्लिम तमन्ना अली को एक हिंदू पुलिस अफसर की मदद से इतना भाई कि उन्होंने अपने नवजात बेटे का नाम ही पुलिस अधिकारी के नाम पर 'रणविजय खान' रख लिया। दरअसल, बरेली की रहने वाली तमन्ना के पति अनीस खान किसी निजी काम से करीब 10 दिन पहले नोएडा गए थे। वह वापस आने की तैयारी कर रहे थे, तभी लॉकडाउन कर दिया गया। दूसरी तरफ घर में अकेली तमन्ना प्रेग्नेंट थीं। अनीस नोएडा से वापस नहीं जा पा रहे थे और तमन्ना अकेली परेशान थीं। बुधवार को तमन्ना ने सोशल मीडिया पर एक विडियो डाला और अपनी परेशानी शेयर की। उस वक्त अपने लिए दवा खरीद रहे थे रणविजय विडियो बरेली के एसपी तक पहुंचा तो उन्होंने नोएडा में तैनात एडीसीपी कुमार रणविजय सिंह से मामले में मदद करने को कहा। उस दौरान रणविजय एक मेडिकल स्टोर पर अपने लिए कुछ दवाइयां खरीद रहे थे। वहीं तमन्ना की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। इसी बीच उनके पास रणविजय ने फोन किया और अनीस की लोकेशन के बारे में पता किया। उन्हें इस बात की भी जानकारी मिली कि तमन्ना को लेबर पेन शुरू हो गया है, और उनके घर में कोई भी नहीं है। जानें: 'पत्नी ने छोड़ दी थी मेरे आने की उम्मीद' बुधवार रात करीब 11 बजे रणविजय ने गाड़ी की व्यवस्था की और उसपर ऑर्डर पास लगवाकर अनीस को बरेली भेजा। रात में 2:30 बजे जब रणविजय बरेली पहुंचे, तब तक लोगों की मदद से तमन्ना को हॉस्पिटल में एडमिट कराया जा चुका था। एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत में अनीस ने बताया कि जब मेरी पत्नी ने मुझे देखा तब उसकी आंखों के आंसू रुके। उसने तुरंत रणविजय सर को मैसेज किया कि अगर बेटा हुआ तो वह उसका नाम रणविजय ही रखेगी। उन्होंने कहा, 'मेरे बरेली पहुंचने के करीब 45 मिनट के बाद मैं पिता बना। हमने उसका नाम रणविजय खान रखा है। मेरी पत्नी को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि मैं उसके पास पहुंच पाऊंगा लेकिन पुलिस की मदद से पहुंच गया।' ' पुलिसवाले सख्त, पर नहीं देख पाते किसी का दर्द' वहीं एडीसीपी रणविजय का कहना है कि उन्होंने सिर्फ अपनी जिम्मेदारी निभाई है। रणविजय ने कहा, 'लोग पुलिसवालों को सख्त समझते हैं, लेकिन हम जितना सख्त होते हैं, उतना ही मानवीय जरूरतों को भी समझते हैं। हमसे किसी का दर्द नहीं देखा जाता। एक महिला जब मां बनने वाली होती है, उस समय अपने पति की उसे सबसे ज्यादा जरूरत होती है। मैंने उनसे कहा था कि मैं पूरी कोशिश करूंगा कि उनके पति उनके पास पहुंच जाएं। मैंने बस अपनी ड्यूटी निभाई।'
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