मुस्लिम सभा में कितनों को कोरोना? 4 राज्य जुटे
नई दिल्ली को रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है। तमाम अपील के बावजूद लोग इसे समझ नहीं रहे हैं। हाल ही में दिल्ली में तबलीगी जमात का एक धार्मिक आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में पहुंचे तमाम धर्मगुरु और अन्य लोग अब देशभर में फैल गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि ये लोग कोरोना संक्रमित हो सकते हैं। अब कई राज्यों की सरकारें इन लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। इस कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों के कोरोना पॉजिटिव होने की आशंका के चलते कम से कम चार राज्यों के स्वास्थ्य विभाग की टीमें इन लोगों को तलाश रही हैं। इसी में से एक शख्स का बुधवार को कोरोना टेस्ट किया गया, जिसके बाद उसे होम क्वारंटाइन में रहने को कहा गया। अभी उसके टेस्ट रिजल्ट का इंतजार है लेकिन उसके संपर्क में आए सभी लोगों की तलाश शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि इसी कार्यक्रम में शामिल हुए एक 65 वर्षीय कश्मीरी बुजुर्ग की कोरोना के चलते मौत हो चुकी है। मलेशिया से आए और भारत में फैल गए हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, इस ग्रुप में शामिल हुए ज्यादातर लोग मलेशिया और इंडोनेशिया के नागरिक थे। ये लोग 27 फरवरी से 1 मार्च के बीत कुआलालांपुर में हुए इस्लामिक उपदेशकों के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद भारत गए थे। दिल्ली में रहने के दौरान ये लोग कई दूसरे लोगों के संपर्क में आए इसलिए अब बाकी लोगों की तलाश हो रही है। इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, ये लोग उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और अंडमान-निकोबार भी गए। अब जम्मू-कश्मीर और दिल्ली प्रशासन के अलावा तमिलनाडु और तेलंगाना की सरकारे भी उन लोगों की तलाश कर रही हैं, जो इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे। दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि एसडीएम और वरिष्ठ अधिकारियों की टीम इन लोगों का पता लगाने का काम कर रही है। दिल्ली की टीम कई अन्य राज्यों के संपर्क में भी है। उन लोगों की तलाश जारी है, जो 51 वर्षीय उपदेशक के संपर्क में आए थे। इन लोगों के कोरोना संक्रमित होने की आशंका जताई जा रही है। क्या है तबलीगी जमात? साल 1926 में मौलाना मोहम्मद इलियास नामक इस्लामिक स्कॉलर ने तबलीगी जमात की शुरुआत की थी। वर्तमान में हरियाणा के मेवात क्षेत्र से शुरू हुआ यह जमात अब 150 देशों में फैला हुआ है। इसके बारे में कहा जाता है कि इसका कोई तय ढांचा नहीं है और ना ही इसके सदस्यों का कोई रेकॉर्ड है। ये लोग थोड़ा छिपकर रहते हैं और राजनीति से वास्ता नहीं रखते। इस जमात के लोगों का मानना है कि मस्जिदों को बढ़ावा दिया जाए, जहां लोग खा सकें, पढ़ सकें और प्रार्थना कर सकें।
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