कोरोना: हर नागरिक को भोजन के लिए याचिका
नई दिल्ली महामारी के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह देश भर के हर नागरिक के लिए सरकार मेडिकल सुविधा, खाने की व्यवस्था और रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करे। सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि किसी भी नागरिक की आर्थिक स्थिति जो भी हो न सिर्फ गरीब बल्कि मिडिल क्लास सहित पूरे देश के नागरिक को ये सुविधाएं मुहैया कराए। सुप्रीम कोर्ट में सुमित मेहता और विक्रांत नारुला की ओर से अर्जी दाखिल कर केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और आरबीआई को प्रतिवादी बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में कहा गया है कि देश भर में महामारी फैली है। कोर्ट के मामले में दखल देने की जरूरत है। केंद्र सरकार ने हाल में वित्तिय सहायता की जो घोषणा की है वह सिर्फ एक वर्ग विशेष के लिए है। लेकिन ये उपाय पर्याप्त नहीं है, बाकी जनता असहाय है। लॉकडाउन का आदेश जारी हुआ है। देश ठहर गया है। जो लोग भी ग्राउंड ड्यूटी पर हैं उन्हें ज्यादा खतरा है। याचिका में कहा गया है कि सरकार अभी तक गरीबों को खाना और शेल्टर देने में विफल हो रही है। ज्यादातर प्रवासी मजदूर हैं और वो बीपीएल कोटे वाले हैं। इस वर्ग ने लॉकडाउन का गंभीरता से पालन नहीं किया है, इस कारण महामारी बढ़ने का खतरा है। केंद्र सरकार को चाहिए कि मिडिल क्लास को भी लॉकहाउन की स्थिति में सहायता करे। सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि केंद्र सरकार को कहा जाए कि वह देश भर के हर नागरिक को वित्तीय स्थिति के इतर जाकर मेडिकल, खाना और शेल्टर की व्यवस्था कराए। ये सुविधा सिर्फ गरीबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हर रेजिडेंशल एरिया में मोबाइल वेंडर भेजे जाएं जो जरूरी खाने का सामान और मेडिकल आइटम मुहैया कराए। गाइडलाइंस जारी किया जाए कि किसी भी नागरिक की नौकरी नहीं जाएगी। लॉकहाउन के कारण नौकरी से नहीं निकाला जाएगा।
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