निर्भया: याचिका पर SC- इससे जरूरी कुछ नहीं
नई दिल्ली निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या के दोषियों को 1 फरवरी को फांसी दी जानी है। इस खौफ में जी रहे दोषियों में एक मुकेश सिंह ने से मांग की है कि वह राष्ट्रपति से दया याचिका खारिज होने के खिलाफ दायर याचिका पर जल्द सुनवाई करे। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मांग पर उसे रजिस्ट्री जाने का सुझाव दिया है। खुद चीफ जस्टिस एस. ए. बोबडे ने माना कि मुकेश की याचिका पर त्वरित सुनवाई आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को 1 फरवरी को (तीन दिन बाद) फांसी पर चढ़ाया जाना है तो उसकी याचिका पर सुनवाई पहली प्राथमिकता है। गौरतलब है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने निर्भया बलात्कार मामले के दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका 17 जनवरी को खारिज कर दी थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजे जाने के तुरंत बाद राष्ट्रपति ने इसे खारिज कर दिया। मुकेश सिंह ने कुछ दिन पहले ही दया याचिका दायर की थी। 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली में हुई इस खौफनाक घटना के एक अन्य दोषी विनय शर्मा की माफी याचिका भी राष्ट्रपति के पास पहुंची थी, लेकिन उसने बाद में यह कहते हुए अर्जी वापस ले ली थी कि इसके लिए उसकी राय नहीं ली गई थी। उसने अब तक राष्ट्रपति के पास दया याचिका नहीं दी है। वहीं, दो अन्य दोषियों अक्षय ठाकुर और पवन गुप्ता के पास भी राष्ट्रपति से क्षमा दान की गुहार लगाने का विकल्प बचा है। कहा जा रहा है कि इन तीनों में कोई एक 31 जनवरी तक दया याचिका दाखिल कर देगा। उसके बाद बाकी दो भी बारी-बारी से दया याचिका दाखिल कर सकते हैं ताकि फांसी को ज्यादा से ज्यादा वक्त के लिए टाला जा सके। निर्भया के माता-पिता भी यही आशंका जताते हुए निराशा प्रकट कर चुके हैं।
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