पद्मश्री पति: पत्नी बोली, जिंदा होते तो साथ लेते
भोपाल देश की सबसे भयानक विभीषिकाओं में से एक ती 1984 की भोपाल गैस त्रासदी। इस दर्दनाक हादसे ने जहां कइयों की जान ले ली थी, वहीं कुछ ऐसे भी थे जो बाकी बची जिंदगियों से उस बुरी याद के निशान मिटाने की कोशिश कर रहे थे। उन्हीं में से एक थे सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल जब्बार जिन्हें मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान से नावाजा गया। इस मौके पर उनकी पत्नी खुश भी रहीं लेकिन पति की याद में आंखें भी नम हो गईं। खुद भी पीड़ित थे जब्बार की पत्नी शायरा बानो ने कहा कि अगर उनके पति जिंदा होते, तो दोनों साथ में यह पुरस्कार लेते। उन्होंने कहा, 'मैं खुश भी हूं और दुखी भी। अगर वह जिंदा होते तो हम यह सम्मान साथ में लेते। मेरे ससुराल के लोगों की जान भोपाल त्रासदी में चली गई और उसके बाद मेरे पति ने पीड़ितों के लिए काम करने का फैसला किया। वह खुद भी गैस के नुकसान झेल रहे थे।' यह भी पढ़ें: न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे थे जब्बार त्रासदी के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे थे। बीते साल 14 नवंबर को लंबी बीमारी के बाद उनकी मौत हो गई। दुनिया की सबसे भयानक औद्योगिक आपदा कही जाने वाली उस घटना में जब्बार की 50 प्रतिशत आंखों की रोशनी चली गई थी और उन्हें लंग फाइब्रोसिस हो गया था। बता दें कि 2-3 दिसंबर, 1984 की रात यूनियन कार्बाइड के पेस्टिसाइड प्लांट से मिथाइल आइसोसायनाइट गैस लीक होने से हजारों लोग मौत की नींद सो गए थे।
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