निर्भया: दोषियों के पास अब क्या विकल्प, समझें

नई दिल्ली निर्भया के दोषी फांसी की सजा टालने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। 1 फरवरी को फांसी की तारीख तय है और मंगलवार को दोषियों में से एक अक्षय ठाकुर ने क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल की है। मुकेश कुमार के वकील ने कोर्ट में समलैंगिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किए जाने का नया दावा पेश किया है। केस की मौजूदा स्थिति यह है कि इन चारों को सुप्रीम कोर्ट ने दोषी करार देते हुए फांसी की सजा दी है और चारों की ही रिव्यू पिटिशन खारिज हो चुकी है। यहां जानें कि निर्भया के छह दोषियों में से किसकी आज क्या स्थिति है... राम सिंह तिहाड़ में ट्रायल के दौरान 11 मार्च 2013 को आत्महत्या कर ली। जूवेनाइल दोषी 3 साल बाल सुधार गृह में बिताने के बाद 2015 में उसे रिहा कर दिया गया। जूवेनाइल दोषी की लोकशन जाहिर नहीं की गई है क्योंकि उसकी जान को खतरा है। पढ़ें : मुकेश सिंह रिव्यू पिटिशन: जुलाई 2018 में खारिज क्यूरेटिव पिटिशन: इस महीने खारिज दया याचिका: 17 जनवरी 2020 को राष्ट्रपति ने खारिज की। सुप्रीम कोर्ट में इसके बाद लगाई गुहार। कोर्ट अगर अपील खारिज करती है तो कोई विकल्प नहीं बचेगा। अक्षय ठाकुर रिव्यू पिटिशन: दिसंबर 2019 में खारिज क्यूरेटिव पिटिशन: 28 जनवरी 2020 को दाखिल की दया याचिका: राष्ट्रपति के पास अभी तक नहीं लगाई गुहार, यह विकल्प बचा है। पवन गुप्ता रिव्यू पिटिशन : जुलाई 2018 में खारिज क्यूरेटिव पिटिशन : क्यूरेटिव पिटिशन अभी तक नहीं डाली दया याचिका: यह विकल्प भी अभी बचा है। विनय शर्मा रिव्यू पिटिशन: जुलाई 2018 में खारिज क्यूरेटिव पिटिश: जनवरी 2020 में खारिज दया याचिका: अभी यह विकल्प बचा है। पढ़ें : दिल्ली जेल कानून क्या कहता है जेल कानून के तहत दया याचिका खारिज होने के बाद दोषी को फांसी से पहले 14 दिन का वक्त दिया जाता है। अगर एक ही मामले में कई दोषी करार हैं और सबको फांसी की सजा मुकर्रर है तो फांसी एक साथ ही हो सकती है। वॉरंट जारी होने के बाद टली फांसी दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने 22 जनवरी को डेथ वॉरंट जारी किया था। इसके बाद दोषियों ने कानूनी तिकड़म का सहारा लिया और डेथ वॉरंट 1 फरवरी तक टालने में कामयाब रहे।


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