शाहीन बाग: इन 50 के हाथ में विरोध की कमान!
नंदिता दासगुप्ता, नई दिल्ली पिछले 45 दिन से जारी है और महिलाएं मोर्चा संभाले हैं। 22 साल की रुबी प्रदर्शन के बदले पैसे लेने और दूसरे आरोपों पर कहती हैं कि हम गांधीजी के तीन बंदर की तरह है। प्रदर्शन की कमान 30 से 50 महिलाओं के समूह पर है। इनमें सबसे युवा 22 साल की हैं जबकि सबसे उम्रदराज महिला 60 पार कर चुकी हैं। शाहीन बाग में टेंट बनाकर रह रही इन महिलाओं का कहना है कि जब तक काला कानून (नागरिकता कानून) नहीं हटेगा, हम भी यहां से नहीं हटेंगे। महिलाओं ने संभाल रखा है मोर्चा किसी के लिए भी आश्चर्य की बात है कि कुछ होममेकर्स, प्रफेशनल और कॉलेज स्टूडेंट्स कैसे इस प्रदर्शन का मोर्चा संभाले हुए हैं। इनके पीछे कौन है? इसके जवाब में 10 से अधिक महिलाएं एक सुर में कहती हैं, 'हम हैं।' मंगलवार को स्टेड से महिलाओं ने समवेत स्वर में कहा, 'हम सब लीडर हैं।' प्रदर्शनकारियों में सबसे बुजुर्ग महिलाओं में से एक जामिया नगर की जाहिरा कहती हैं कि यहां सब लीडर हैं। महिलाओं ने अपना समूह बना लिया है और बारी-बारी से अपनी ड्यूटी बदलती रहती हैं। स्टेज से भीड़ को नियंत्रित करती हैं और प्रदर्शन का नेतृत्व करती हैं। पढ़ें : जामिया में छात्रों पर हमले के बाद शुरू हुआ प्रदर्शन नाज़िया शकील ने इस प्रदर्शन की शुरुआत को याद करते हुए कहा, '15 दिसंबर की रात पुलिस ने जामिया मिलिया पर हमला बोला था। इसके बाद हमारी कॉलोनी तक मार्च निकाला गया। हमने टीवी पर उस दिन भयानक घटना देखी। कुछ देर बाद जब स्थितियां नियंत्रण में आईं तो हमारा पूरा पड़ोस मोहल्ला इकट्ठा हो गया गया और हमने तय किया कि अगर आज नहीं करेंगे तो कब करेंगे?' कौन कर रहा है आंदोलन को फंड अक्सर यह चर्चा होती है कि इस आंदोलन को कौन फंड कर रहा है? प्रदर्शनकारियों में से एक रितु ने बताया कि यह आंदोलन अपनी प्रेरणा से शुरु हुआ है। कुछ लोगों ने स्वैच्छिक दान दिया जिससे जनरेटर और टेंट की व्यवस्था हुई। रितु ने बताया कि कुछ समूह खाने का इंतजाम कर देते हैं और किसी ने माइक सिस्टम दिया। पढ़ें : कौन चला रहा है प्रदर्शन को शाहीन इकरा अपनी बुलंद आवाज के लिए शाहीन बाग प्रदर्शन में चर्चित हो गई हैं। रितु कौशिक, नाजिया और कहकशां के साथ शाहीन इकरा इस प्रदर्शन का खास चेहरा बन गई है। इकरा कहती हैं, 'यह सब कुछ स्वाभाविक तरीके से हुआ एक पेपर था जो जल्द रजिस्टर में बदल गया। रजिस्टर में समर्थन देनेवालों के नाम लिखे जाते हैं।' कौशिक ने बताया कि मुझ पर 500 रुपये के बदले प्रदर्शन चलाने का आरोप लगा। मुझे बुरी तरह से ट्रोल किया गया जिसके बाद मैंने अपना फेसबुक अकाउंट सस्पेंड कर दिया।
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