CAA पर EU संसद को बिरला की ये नसीहत

नई दिल्ली के खिलाफ प्रस्ताव लाए जाने को लेकर ओम बिरला ने यूरोपियन संसद के अध्यक्ष को खत लिखकर इस पर पुनर्विचार को कहा है। खत में स्पीकर ने के औचित्य को समझाते हुए बताया है कि यह पड़ोसी देशों में धार्मिक प्रताड़ना के शिकार हुए लोगों को आसानी से नागरिकता देने के लिए है और यह किसी की नागरिकता नहीं छीनता। CAA किसी की नागरिकता नहीं छीनता: बिरला यूरोपियन पार्ल्यामेंट के अध्यक्ष डेविड मारिया ससौली को लिखे खत में स्पीकर बिरला ने लिखा है, 'यह कानून (CAA) हमारे ठीक पड़ोसी देशों में धार्मिक प्रताड़ना के शिकार हुए लोगों को आसानी से नागरिकता देने के लिए है। इसका उद्देश्य किसी की नागरिकता को छीनना नहीं है। भारतीय संसद के दोनों सदनों में चर्चा के बाद इसे पास किया गया।' 'एक दूसरे की संप्रभु प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए' बिरला ने को भारत में बनाए कानून का सम्मान करने की भी नसीहत दी है। उन्होंने आगे लिखा है, 'इंटर पार्ल्यामेंटरी यूनियन का सदस्य होने के नाते, हमें एक दूसरे की संप्रभु प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए, खासकर लोकतंत्र में। एक विधायिका का दूसरी विधायिका पर फैसला सुनाना गलत है, यह ऐसी परंपरा है जिसका निहित स्वार्थों के लिए निश्चित तौर पर दुरुपयोग किया जा सकता है। इस संदर्भ में मैं आपसे प्रस्तावित रिजॉलूशन पर पुनर्विचार की गुजारिश करूंगा और मुझे पूरा विश्वास है कि हम में से कोई भी अस्वस्थ उदाहरण पेश नहीं करेगा।' पढ़ें: प्रस्ताव पर ईयू संसद में बुधवार को होना है मतदान बता दें कि ईयू संसद में पिछले हफ्ते यूरोपियन यूनाइटेड लेफ्ट/नॉर्डिक ग्रीन लेफ्ट (जीयूई/एनजीएल) समूह ने प्रस्ताव पेश किया था जिस पर बुधवार को बहस होगी और इसके एक दिन बाद मतदान होगा। भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि नया नागरिकता कानून पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है। अधिकारी ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि यूरोपीय यूनियन में इस प्रस्ताव को लाने वाले और इसका समर्थन करने वाले लोग सभी तथ्यों को समझने के लिए भारत से संपर्क करेंगे। ईयू संसद को ऐसी कार्रवाई नहीं करनी चाहिए जिससे लोकतांत्रिक तरीके से चुनी विधायिका के अधिकारों पर सवाल खड़े हों।'


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