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केरल: कार्डिनल के खिलाफ उतरे 150 पादरी

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कोच्चि केरल की साइरो-मालाबार चर्च में शुक्रवार को 150 पादरियों ने बगावत के सुर बुलंद कर दिए। एर्नाकुलम-अंगामली आर्चडायसिस के इन पादरियों ने कार्डिनल जॉर्ज मार अलनचेरी का सहयोग करने से इनकार कर दिया है। कार्डिनल जॉर्ज को गुरुवार को डायसिस के प्रशासनिक हेड के तौर पर वैटिकन ने दोबारा नियुक्त किया था। गौरतलब है कि जॉर्ज को पिछले साल पद से हटा दिया गया था। उनके खिलाफ एक आंतरिक आयोग ने जांच में जमीन से जुड़े समझौतों में अनियमितता पाई थी जिनके कारण चर्च को भारी नुकसान हुआ था। पादरियों ने रिजॉलूशन का एक ड्राफ्ट तैयार किया है जिसमें कहा गया है- 'क्या वैटिक और साइनॉड के बिशप को लगता है कि पादरी ऐसे आर्चबिशप के साथ काम कर सकेंगे जो जमीन के समझौतों में अनियमितताओं के लिए कोर्ट की नजर में हैं?' पादरियों का कहना है कि इस कदम से लोगों का साइनॉड और चर्च में विश्वास घटेगा। बिशप को हटाने से विरोध तेज माना जा रहा है कि इस विरोध प्रदर्शन के पीछे जॉर्ज को फिर से नियुक्त किए जाने के बाद दो बिशप- सबैस्टियन और होजे को निलंबित किया जाना एक बड़ा कारण है। दोनों बिशप पादरियों के विरोध प्रदर्शन में साथ...

100 सालों में 5वीं बार इतना सूखा गुजर रहा जून

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अमित भट्टाचार्य, नई दिल्ली इस साल जून के महीने में खासी गर्मी देखने को मिली है। मौसम विभाग के मुताबिक बीते 100 सालों में यह पांचवां सबसे सूखा जून है। पूरे देश में जून के महीने में बारिश औसत से 35 फीसदी कम रही है। महीने के खत्म होने में महज दो ही दिन बचे हैं और इस बात की उम्मीद बेहद कम ही है कि यह कमी पूरी हो पाएगी। आमतौर पर जून महीने में 151 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस महीने अब तक यह आंकड़ा 97.9 मिलीमीटर का ही रहा है। इस महीने का अंत 106 से 112 मिलीमीटर तक बारिश के साथ होने की संभावना है। 1920 के बाद से ऐसे 4 ही साल थे, जब इस कदर सूखा गुजरा था। 2009 में सबसे कम 85.7 मिलीमीटर, 2014 में 95.4, 1926 में 98.7 मिलीमीटर और 1923 में 102 मिलीमीटर बारिश हुई थी। 2009 और 2014 दोनों ही वर्ष ऐसे थे, जब मॉनसून अल-नीनो के प्रभाव के चलते कमजोर रहा था। इस साल भी ऐसी ही स्थिति है। अल-नीनो के प्रभाव के चलते पूर्वी और मध्य प्रशांत महासागर की सतह में असामान्य रूप से गर्मी की स्थिति होती है। इससे हवाओं का चक्र प्रभावित होता है और यह भारतीय मॉनसून पर बेहद विपरीत प्रभाव डालता है। इस साल मौसम वैज्ञानिकों...

SC दर्जा: योगी ने एक तीर से साधे कई निशाने

'कट मनी' पर घमासान, TMC का BJP पर वार

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कोलकाता एक तरफ पश्चिम बंगाल में हिंसा का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से '' लिए जाने को लेकर पश्चिम बंगाल में बवाल मचा हुआ है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ इस मुहिम में बीजेपी के शामिल हो जाने के बाद 'कट मनी' वापस करने की मांग और तेज हुई है। सूबे में लगातार हिंसा के बीच इस मुद्दे पर भी बीजेपी और तृणमूल के रिश्तों में तल्खी बढ़ती दिख रही है। बता दें कि ने गत 18 जून को तृणमूल पार्षदों की एक बैठक में उन्हें आदेश दिया था कि वे लाभार्थियों से लिया गया कट मनी वापस करें। उन्होंने तब कहा था, ‘मैं अपनी पार्टी में चोरों को नहीं रखना चाहती। यदि मैं कार्रवाई करूंगी, वे किसी और पार्टी में शामिल हो जाएंगे। कुछ नेता गरीबों को आवास अनुदान मुहैया कराने के लिए 25 प्रतिशत कमीशन मांग रहे हैं। यह तुरंत रुकना चाहिए। अगर आपने लिया है तो पैसा तत्काल लौटा दीजिए। मांगों को लेकर सड़क पर लाभार्थी लाभार्थी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों ने अब विधायक और पार्षदों का घेराव कर योजनाओं के दौरान उनसे ली गई कट मनी को वापस करने ...

मुंबई: बारिश से फ्लाइट्स, ट्रेनें प्रभावित, 3 मरे

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महाराष्ट्र के मुंबई, ठाणे, कल्याण, पालघर और आस-पास के जिलों में हुई जोरदार से जगह-जगह पानी भरने से के नाला सफाई के दावों की पोल खुल गई। इस दौरान करंट लगने से तीन लोगों की मौत हो गई है। इसके अलावा बारिश में 5 लोगों के घायल होने की भी खबर है। आठ मिनट में तीन की मौत बीएमसी डिजास्टर मैनेजमेंट से मिली जानकारी के अनुसार, करंट लगने के दो अलग मामलों में तीन लोगों की मौत हो गई। गोरेगांव के इरवानी इस्टेट में सुबह 7:56 बजे ही करंट की चपेट में चार लोग आ गए थे, जिनमें से अस्पताल में राजेंद्र यादव (60), संजय यादव (24) को मृत घोषित कर दिया। एक बच्चे समेत दो लोगों का इलाज चल रहा है। अंधेरी (वेस्ट) में भी सुबह 7:48 बजे काशिमा युडियार (60) की करंट लगने से मौत हो गई। इसके अलावा, महानगर में छह जगह घर गिरने के मामले सामने आए। इनमें घायल हुए तीन में से दो की हालत गंभीर है। लोकल से लेकर फ्लाइट्स तक प्रभावित भारी बारिश के कारण मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल भी बुरी तरह प्रभावित रही। मुंबई लोकल की तीनों लाइन इससे प्रभावित रही। 33 उपनगरीय ट्रेनों के रद्द होने के साथ ही 250 ट्रेनें देरी से चलीं। मध्य र...

झारखंड: शादी के खाने में छिपकली, 60 बीमार

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दुमका झारखंड के दुमका में खाने के बाद लोगों के हो जाने का मामला सामने आया है। यहां एक गांव में शादी समारोह में खाना खाने के बाद 60 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए। खाने में छिपकली पड़ जाने की वजह से लोग बीमार हुए। सभी को हॉस्पिटल में फर्स्ट ऐड दे दिया गया है, जिसके बाद सभी की स्थिति खतरे से बाहर है। दुमका के एसपी वाई. एस. रमेश ने जानकारी देते हुए बताया, 'यहां के चंदन पहाड़ी गांव में हुई इस घटना के बाद सरकारी अस्पताल में अफरातफरी का माहौल रहा। बीमारों में कई बच्चे भी शामिल थे। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद ओआरएस और जरुरी दवाएं दी, जिसके बाद सभी की स्थिति खतरे से बाहर है।' उन्होंने बताया, 'भोज के दौरान खाने में छिपकली गिर गई थी, जिसके कारण लोगों की तबीयत खराब हो गई थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद बीमार लोगों को एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के बाद स्थिति नियंत्रण में है।' दुमका सदर अस्पताल के डेप्युटी सुपरिटेंडेंट डॉ. विनोद कुमार सिन्हा ने कहा, 'छिपकली में इतना जहर नहीं होता है कि कोई बहुत बड़ी घटना हो। यह एक मनोवैज्ञानिक समस्या की तरह है, क्योंकि लोगों को...

100 सालों में 5वीं बार इतना सूखा गुजर रहा जून

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अमित भट्टाचार्य, नई दिल्ली इस साल जून के महीने में खासी गर्मी देखने को मिली है। मौसम विभाग के मुताबिक बीते 100 सालों में यह पांचवां सबसे सूखा जून है। पूरे देश में जून के महीने में बारिश औसत से 35 फीसदी कम रही है। महीने के खत्म होने में महज दो ही दिन बचे हैं और इस बात की उम्मीद बेहद कम ही है कि यह कमी पूरी हो पाएगी। आमतौर पर जून महीने में 151 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस महीने अब तक यह आंकड़ा 97.9 मिलीमीटर का ही रहा है। इस महीने का अंत 106 से 112 मिलीमीटर तक बारिश के साथ होने की संभावना है। 1920 के बाद से ऐसे 4 ही साल थे, जब इस कदर सूखा गुजरा था। 2009 में सबसे कम 85.7 मिलीमीटर, 2014 में 95.4, 1926 में 98.7 मिलीमीटर और 1923 में 102 मिलीमीटर बारिश हुई थी। 2009 और 2014 दोनों ही वर्ष ऐसे थे, जब मॉनसून अल-नीनो के प्रभाव के चलते कमजोर रहा था। इस साल भी ऐसी ही स्थिति है। अल-नीनो के प्रभाव के चलते पूर्वी और मध्य प्रशांत महासागर की सतह में असामान्य रूप से गर्मी की स्थिति होती है। इससे हवाओं का चक्र प्रभावित होता है और यह भारतीय मॉनसून पर बेहद विपरीत प्रभाव डालता है। इस साल मौसम वैज्ञानिकों...