दिल्ली में मॉनसून की एंट्री, आज यहां बारिश
नई दिल्ली मॉनसून ने उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद को पूरी तरह कवर कर लिया है। दिल्ली के दरवाजे पर खड़े मॉनसून ने बुधवार को बारिश कराई और गुरुवार को भी बादल बरसेंगे, इसकी उम्मीद है। पड़ोसी हरियाणा में भी बारिश हुई है, वहां मॉनसून आमतौर पर जुलाई के पहले हफ्ते में पहुंचता है। पंजाब के उत्तरी हिस्सों, चंडीगढ़ तक मॉनसून बढ़ चुका है, आज यह और आगे बढ़ेगा। दूसरी तरफ, साउथवेस्ट मॉनसून को एक बड़ा बूस्ट मिल सकता है। प्रशांत महासागर में ला नीना के बनने की संभावना बढ़ गई है। ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ मीटरोलॉजी ने इस बारे में अपडेट जारी किया है। मौसम विभाग आज कर सकता है मॉनसून आने का ऐलानभारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बुधवार शाम 5 बजे के अपडेट में मॉनसून पर जानकारी दी थी। इसके मुताबिक, अगले 24 घंटों में साउथवेस्ट मॉनसून राजस्थान के कुछ और हिस्सों, उत्तर प्रदेश के बाकी हिस्सों, दिल्ली, हरियाणा के अधिकतर हिस्सों और पंजाब की ओर बढ़ेगा। आज शाम को IMD दिल्ली में मॉनसून आने की घोषणा कर सकता है। बुधवार को हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की एंट्री के साथ बारिश हुई। राज्य के लिए यलो वॉर्निंग जारी की गई है। राजस्थान में भी बुधवार को साल की पहली बारिश हुई। IMD के मुताबिक, वहां 12 जिलों में बारिश हुई है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में होगी बारिशदिल्ली के आसमान पर मॉनसून के बादल छाए हुए हैं। गुरुवार को दिनभर ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है। इस दौरान मैक्सिमम टेम्प्रेचर 36 डिग्री सेल्सियस और मिनिमम टेम्प्रेचर 28 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है।अगले कुछ दिन, दिल्ली-एनसीआर में मॉनसून की आमद के साथ ही भारी बारिश का अनुमान है। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के कई हिस्सों में भी अगले दो दिन बारिश होने की संभावना जताई गई है। कुछ जगहों पर भारी बारिश भी हो सकती है। असम में बाढ़, साउथ इंडिया में भी बारिशअसम के पांच जिलों में बाढ़ आ गई है। करीब 38 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। डिब्रूगढ़, जोरहाट, मजुली, धेमाजी और शिवसागर जिलों में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है। केरल और नजदीकी दक्षिणी राज्यों में के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस साल मॉनसून में 96 पर्सेंट से लेकर 104 पर्सेंट बारिश होने का अनुमान है। ला नीना के बनने की पॉसिबिलिटी 50-50ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ मीटरोलॉजी ने ला नीना के बनने की संभावना 50 पर्सेंट कर दी है। यह किसी भी साल में ला नीना आने की संभावना का दोगुना है। इससे किसानों और पॉलिसीमेकर्स के लिए अच्छी खबर के रूप में देखा जा रहा है। प्रशांत महासागर के सतही पानी के ठंडे होने पर ला नीना बनता है। IMD ने भी पहले भविष्यवाणी की थी कि आधा मॉनसून गुजर जाने पर एक हल्का ला नीना बनेगा। अच्छे मॉनसून से ग्रामीण इलाकों की आय बढ़ती है।
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