27 सितंबर पर सबकी नजरें, कश्मीर में डोभाल

श्रीनगर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार दोबारा कश्मीर घाटी के दौरे पर हैं। सूत्रों के अनुसार, डोभाल कश्मीर में हालात की समीक्षा करने और सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल करने के लिए घाटी आए हैं। पर, इस बार डोभाल का यह दौरा इस मायने में भी काफी अहम है कि संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली (यूएनजीए) में 27 सितंबर को पीएम और पाकिस्तान के पीएम का भाषण होने वाला है। इसे लेकर घाटी में कई तरह की अफवाहें हैं। कुछ लोगों को लग रहा है कि इसके बाद स्थिति बेहतर होगी, तो वहीं एक वर्ग कानून-व्यवस्था को लेकर डरा भी हुआ है। दरअसल, 27 सितंबर के भाषण को लेकर यहां स्थानीय लोग तरह- तरह के अनुमान लगा रहे हैं। मस्जिदों और अंतिम संस्कारों में इकट्ठा होने वाले कुछ स्थानीय लोगों का मानना था कि मोदी और उनके समकक्ष के संयुक्त राष्ट्र में भाषण के बाद घाटी में कानून-व्यवस्था के मुद्दे को गति मिलेगी। 'भाषण के अनुसार देंगे लोग प्रतिक्रिया' हमारे सहयोगी इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में 60 वर्षीय मुहम्मद यकूब कहते हैं, 'देखते हैं 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र में क्या होता है। हमें पता चल जाएगा कि दोनों देशों ने कश्मीर के लिए क्या योजना बनाई है और लोग उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देंगे।' कंप्यूटर इंजिनियर मुहम्मद फुरकान कहते हैं, यूएनजीए में पीएम मोदी और इमरान के भाषण का सीधा असर घाटी पर पड़ने वाला है।' 31 अक्टूबर से लागू होंगे कानून बता दें कि 31 अक्टूबर को औपचारिक रूप से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में विभाजित किया जाएगा और देश के अन्य हिस्सों की तरह यहां पर भी सभी कानून लागू होंगे। 31 अक्टूबर से पहले डोभाल के इस दौरे को काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि डोभाल अगले कितने दिनों तक कश्मीर घाटी में रहेंगे। 5 अगस्त को किया था पहला दौरा इससे पहले 5 अगस्त को अजीत डोभाल कश्मीर घाटी के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरे पर डोभाल 11 दिनों तक कश्मीर में ही रुके थे। यहां डोभाल ने शोपियां जिले के स्थानीय लोगों के साथ बातचीत भी की थी। वहीं बकरीद से पूर्व उन्होंने श्रीनगर के कुछ बाजारों का दौरा भी किया था।


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