जस्टिस शाह बोले, 'जजों की जवाबदेही तय हो'

प्रदीप ठाकुर, नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पर यौन शोषण संबंधी आरोपों की जांच प्रक्रिया पर जस्टिस ए पी शाह ने गंभीर सवाल उठाए। लॉ कमिशन के पूर्व चेयरमैन जस्टिस शाह ने कहा कि इस केस में पूरी प्रक्रिया न्यायपालिका की स्वतंता के नाम पर बहुत गोपनीय तरीके से की गई। जस्टिस शाह ने कहा कि न्यायपालिका का सिद्धांत है कि अपने मामले में कोई शख्स खुद न्यायधीश नहीं बन सकता। पिछले 3 चीफ जस्टिस ने न्यायपालिका के मौलिक सिद्धांत का उल्लंघन किया है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया घटना पर जस्टिस शाह ने उठाए सवाल 2010 में जस्टिस शाह दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के पद से सेवानिवृत हो चुके हैं। उन्होंने न्यायपालिका में घटित कुछ उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि जजों के लिए भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व स्थाई कर्मचारी को सिर्फ इसलिए हटा दिया गया क्योंकि कथित तौर पर अपने सिटिंग अरेंजमेंट से वह नाखुश था। इस कर्मचारी पर आरोप है कि उसने आधे दिन की कैजुअल लीव भी ली थी। उसके परिवार के सदस्य को भी थोड़े दिनों बाद बर्खास्त कर दिया गया। रिश्तेदार महिला ने चीफ जस्टिस पर यौन हिंसा के आरोप लगाए थे।' चीफ जस्टिस मामले में सुनवाई प्रक्रिया पर जताई नाराजगी जस्टिस शाह ने चीफ जस्टिस पर यौन हिंसा के मामले में हुई जांच प्रक्रिया पर नारजगी उठाई। उन्होंने कहा, 'महिला की शिकायत के जवाब में शनिवार को केस की सुनवाई हुई। अमूमन ऐसा नहीं होता है।' उन्होंने मामले में क्लीन चिट देते हुए सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा महिला की शिकायत को झूठ करार देने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया।


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