'आतंकी साजिश फेल करने को फोर्स की तैनाती'

एम सलीम पंडित, नई दिल्ली में शनिवार को अतिरिक्त अर्धसैन्य बलों की तैनाती के बाद से ही आर्टिकल 35 ए या 370 पर फैसले की चर्चा तेज हो गई थी। हालांकि एक टॉप खुफिया अधिकारी ने इसका खंडन करते हुए कहा कि कश्मीर में जवानों की तैनाती को नाकाम करने के लिए की गई है। उनके मुताबिक, खुफिया एजेंसी को ऐसे इनपुट मिले हैं कि घाटी में सुस्त पड़े अलगाववादियों के 'मनोबल' को मजबूत करने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 15 अगस्त को किसी आतंकी घटना की साजिश रच रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि घाटी में जवानों की तैनाती से पहले या बाद में आईएसआई द्वारा किसी भी दुस्साहस को नाकाम करने के लिए की गई है। उन्होंने बताया कि दरअसल राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा कश्मीर में अलगाववादियों के ठिकानों पर हो रही छापेमारी से कश्मीर में आतंकवाद की घटनाओं में कमी आई है और इससे पाकिस्तान बेचैन है। एनआईए लगातार डाल रही रेड बता दें कि रविवार सुबह उत्तरी कश्मीर के बारामुला में ताबतोड़ छापेमारी की थी। एनआईए ने सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर यहां चार जगहों पर छापे मारे थे। एनआईए हवाला नेटवर्क और पाकिस्तान से टेरर फंडिंग की साजिश में संलिप्त होने के शक में पिछले कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है। सामान्य धारा की ओर बढ़ रहे कश्मीर से आतंकी बेचैन अधिकारी ने बताया कि इन दिनों घाटी में पर्यटन में भी इजाफा हुआ है। होटेल फुल हैं। अमरनाथ यात्रियों की संख्या भी अधिक है और पत्थरबाजी की घटनाएं भी कम हुई हैं। उन्होंने आगे बताया कि खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट बताते हैं कि सामान्य धारा और शांति की ओर बढ़ रही घाटी में मौजूद आतंकवादियों के पाकिस्तान स्थित हैंडलर निराश है और कश्मीर में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश रच रहे हैं। घाटी में जवानों की अतिरिक्त तैनाती से हलचल तेज बता दें कि इससे पहले चर्चा थी कि केंद्र सरकार कश्मीर में 35ए हटाने की तैयारी कर रही है। इसीलिए कश्मीर में अर्धसैन्य बलों की 100 टुकड़ियां भेजी गई हैं। सूत्रों के हवाले से कहा गया कि केंद्र सरकार इसके लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। सूत्रों ने यह भी बताया कि 35ए हटाए जाने के विरोध को लेकर हिंसा या राज्य की शांति भंग करने के प्रयास हो सकते हैं। इसे कंट्रोल करने की पूरी कोशिश की जाएगी ताकि आम नागरिकों को कम-से-कम असुविधा हो। कश्मीर के विशेष दर्जे से जुड़े आर्टिकल 370 और 35ए को हटाना मोदी सरकार के अजेंडे में है, लेकिन मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है इसलिए सरकार हड़बड़ी में फैसला नहीं लेना चाहेगी।


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