भारत के'चक्रव्यूह' से चीन का निकलना मुश्किल
दरअसल, कोरोना (corona in china) बीमारी के बारे में समय पर दुनिया को नहीं बताने के आरोप से घिरे चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग (xi jinping) भारत के खिलाफ प्रेशर टैक्टिस का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन WHO से लेकर कई अन्य मंचों पर भारत ने चीन के लिए ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है जिससे उसका निकलना मुश्किल है।भारत ने लद्दाख सीमा पर बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर काफी मजबूत कर लिया है। इससे चीन तिलमिलाया हुआ है। भारत लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक 3,488 किलोमीटर लंबे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के ऊंचाई वाले विवादित क्षेत्रों में रोड और एयर कनेक्टिविटी के मामले में चीन के दबदबे को लगातार चुनौती दे रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एग्जीक्यूटिव बोर्ड की कमान भारत के हाथ में आ चुकी है। कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई। कई रिपोर्ट्स हैं कि शुरुआत में चीन ने इस वायरस के मामलों को छिपाया। धीरे-धीरे कोरोना पूरी दुनिया में फैल गया और आज हालात ये हैं कि तीन लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। चीन की जवाबदेही तय करने की डिमांड दुनिया के कई देशों ने उठाई। अब चीन पर शिकंजा कसने की शुरुआत हो गई है। वहीं चीन का बचाव करने वाले WHO की भूमिका भी तय होगी। भारत समेत दुनिया के 62 देशों ने कोरोना पर एक स्वतंत्र जांच की मांग की है। अगर WHO की जांच चीन के खिलाफ शुरू होगी तो कई छिपे तथ्य सामने आएंगे।
ताइवान की राष्ट्रपति साइ इंग-वेन के शपथ-ग्रहण समारोह में बीजेपी के दो सांसदों के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शिरकत से चीन को मिर्ची लग गई है। उसने भारत से अपने 'आंतरिक' मामलों में दखल से बचने को कहा है। बुधवार को ताइवान की राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण समारोह था। दिल्ली से बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी और राजस्थान के चुरू से सांसद राहुल कासवान ने इसमें तकनीक के जरिए शिरकत की थी और उन्हें दूसरे कार्यकाल की बधाई दी थी। समारोह में शामिल हुईं 41 देशों की 92 हस्तियां ताइवान की राष्ट्रपति के शपथ समारोह में 41 देशों की 92 हस्तियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शिरकत की थी। इनमें भारत से दो सांसदों के अलावा अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ भी शामिल थे। ताइवान की आजादी की समर्थक साई इंग-वेन ने हाल में दूसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली। ताइवान के अमेरिका का भी समर्थन हासिल है। ऐसे में भारत यहां भी चीन के खिलाफ चक्रव्यूह बना सकता है।
South China Sea में तेल के उत्खनन को लेकर चीन और मलेशिया में जारी टकराव के बीच अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ-साथ चीन के जंगी जहाज भी पहुंच गए हैं। भारत का मानना है कि दक्षिण चीन सागर से गुजरने वाले संचार के समुद्री संपर्क हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति, स्थिरता, समृद्धि और विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। मौजूदा स्थिति में भले ही भारत अपने इस रुख में बदलाव न करें लेकिन अगर चीन कोई हिमाकत करेगा तो भारत के रुख में भी बदलाव आ सकता है। साउथ चाइना सी के अधिकांश भूभाग पर चीन अपना दावा करता है जबकि पड़ोसी देश फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताइवान और ब्रुनेई, चीन के इस दावे को नकारते हैं। हाल में ही चीन के बढ़ते दखल को देखते हुए इंडोनेशिया ने दक्षिणी चीन सागर में मौजूद एक द्वीप पर अपने लड़ाकू विमानों को तैनात कर दिया था।
चीन से दुनिया का पसंदीदा मैन्युफैक्चरिंग हब होने का तमगा छिनने के कगार पर है। कोरोना वायरस महामारी के कारण पैदा हुई दिक्कतों के बीच लगभग 1000 विदेशी कंपनियां सरकार के अधिकारियों से भारत में अपनी फैक्ट्रियां लगाने को लेकर बातचीत कर रही हैं। इनमें से कम से कम 300 कंपनियां मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइसेज, टेक्सटाइल्स तथा सिंथेटिक फैब्रिक्स के क्षेत्र में भारत में फैक्ट्रियां लगाने के लिए सरकार से सक्रिय रूप से संपर्क में हैं। अगर बातचीत सफल होती है तो यह चीन के लिए बहुत बड़ा झटका होगा। ये कंपनियां भारत को वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में देखती हैं और सरकार के विभिन्न स्तरों के समक्ष अपना प्रस्ताव पेश कर चुकी हैं, जिनमें विदेश में भारतीय दूतावास तथा राज्यों के उद्योग मंत्रालय शामिल हैं।
लद्दाख में भारत को घेरने में जुटे चीन को हॉन्ग कॉन्ग में तगड़ा झटका लगा है। कई बार हिंसक हो चुके विरोध प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए चीनी सरकार ने हॉन्ग-कॉन्ग के लिए नैशनल सिक्यॉरिटी कानून को संसद में पेश किया है। जिसके खिलाफ हॉन्ग कॉन्ग में सड़कों पर लाखों लोग उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं चीन समर्थित पुलिस लोकतंत्र की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों का सख्ती के साथ दमन कर रही है।
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